जब सुबह की सूरज को देकता हू
सूरज की किरणों को देकता हू
बस यही सोचता हु की
तुम इतनी सुन्दर क्यों हो ?
जब हवा को मेहसूस करता हू
हवा मे छिपी तेरी आहट को मेहसूस करता हू
बस यही सोचता हु की
तुम इतनी सुन्दर क्यों हो ?
जब तुमारी उस नज़र को देकता हू
नज़र में चिपी प्यार भरा हसी को देकता हू
सूरज की किरणों को देकता हू
बस यही सोचता हु की
तुम इतनी सुन्दर क्यों हो ?
जब हवा को मेहसूस करता हू
हवा मे छिपी तेरी आहट को मेहसूस करता हू
बस यही सोचता हु की
तुम इतनी सुन्दर क्यों हो ?
जब तुमारी उस नज़र को देकता हू
नज़र में चिपी प्यार भरा हसी को देकता हू
बस यही सोचता हु की
तुम इतनी सुन्दर क्यों हो ?
तुम इतनी सुन्दर क्यों हो ?
मै सपने भी देका किया करता हू
उस सपनो में तेरी कमी मेहसूस करते
बस यही सोचता हु की
तुम इतनी सुन्दर क्यों हो ?
तुम मुझसे पास रहकर भी दूर हो
जैसे आसमान पास\रहकर भी दूर है
उस दूरी को करीब लाते -लाते
बस यही सोचता हु की
तुम इतनी सुन्दर क्यों हो ?
तुम इतनी सुन्दर क्यों हो ?
-sha(1+nk).
तुम इतनी सुन्दर क्यों हो ?
तुम मुझसे पास रहकर भी दूर हो
जैसे आसमान पास\रहकर भी दूर है
उस दूरी को करीब लाते -लाते
बस यही सोचता हु की
तुम इतनी सुन्दर क्यों हो ?
तुम इतनी सुन्दर क्यों हो ?
-sha(1+nk).